My FM bug project.

आपको जानना चाहिए कि-
यह सच में काम करती है। आप इस कंफ्यूजन में नही रहे कि आपका सर्किट ख़राब है या ऐसी चीजे काम ही नही करती। अगर आपका प्रोजेक्ट सफल नही हो पा रहा तो इसका साफ़ साफ़ और एकमात्र मतलब है कि आप ने सर्किट में कुछ गलत कर दिया है।
इसलिए फुल कॉन्फिडेन्स से इस प्रोजेक्ट को बनाये।

यह क्या काम करता है-
यह आवाज को उठा कर सीधा FM पर प्रसारित करता है। जिसे काफी दूर जाकर किसी भी FM रेडियो की सहायता से सुना जा सकता है।
आप अपने मोबाइल के FM रेडियो का भी उपयोग इसे सुनने के लिए कर सकते है।

सर्किट

image

बैटरी-3 से 9 वोल्ट तक की कोई भी।
ज्यादा बढ़िया आप्शन है 9V वाली बैटरी जो 20 रुपये में आती है।
या फिर पुराने फोन की बैटरी। जो दुबारा चार्ज हो सकती है।

ट्रांजिस्टर- 28 अलग अलग प्रकार के ट्रांजिस्टर मेने लगा लगा कर टेस्ट किये। जिसमे से 22 के साथ यह सर्किट बिल्कुल सही काम कर रहा था।
हर वह ट्रांजिस्टर इसमें काम करेगा जिसका-
Vceo 15 से ऊपर हो।
Ic(max) 15mA से ज्यादा हो।
और T2 की Ft का मान 100 MHz से ज्यादा हो।

T2 का बीटा 100 से ऊपर हो।
तथा T1 का बीटा जितना हो सके उतना हो।

यानि कुल मिलकर T2 एक RF ट्रांजिस्टर होना चाहिए जबकि T1 एक ऑडियो एम्प्लीफायर ट्रांजिस्टर।

और आपको ऊपर लिखी बकवास बिलकुल समझ नही आई तो T2 एंव T1, दोनों की जगह एक ही प्रकार का ट्रांजिस्टर ले सकते है जिस पर लिखे नम्बर BC से सुरु हो और आगे 546 से 549 तक कुछ भी लिखा हो और उसके आगे A,B,C में से कुछ भी लिखा हो।
जैसे BC548B
और अगर आप को यह वाला नही मिल रहा तो,
1815 नंबर वाला भी प्रयोग में ले सकते है जिसका पूरा नाम 2SC1815 है।
2SC सिरीज में O सबसे कमजोर और GR वाला सबसे बढ़िया रहता है।
BC वाली सिरीज में B वाला अच्छा रहेगा।

बाकी, काम तो यह 99% हर ट्रांजिस्टर के साथ करेगा।

कैपेसिटर-
कोष्ठक में कैपेसिटर के नंबर लिखे है जो उस पर लिखे होने चाहिए।
C1 एंव C2 – कोई से भी।
C3 = (101)
C4 = (103)
C5 = (10)
C6 = (27)

C1 एंव C2 की जगह कोई सा भी ले सकते है। जीतनी ज्यादा हाई वैल्यू का होगा उतना ही अच्छा है।
पर सर्किट को छोटा रखने के लिए इन्हें भी हम छोटा ही ले लेंगे तो बढ़िया होगा। इसलिए (104) लिखा हुआ सिरेमिक कैपेसिटर बढ़िया रहेगा।

C3 एंव C4 में आस पास की वैल्यू चल सकती है।
पर C5 और C6 के मान उतने ही हो जितने मेने लिखे है। वर्ना प्रोजेक्ट काम नही करेगा।

इनमे जरुरी होने के हिसाब से क्रम निम्न है-(ज्यादा ऊपर मतलब ज्यादा जरुरी)
C5,C6
C4
C3
C1,C2

ये सभी सिरेमिक कैपेसिटर है।

रेजिस्टेंस-
R1 माइक के हिसाब से,
R2,R3 ट्रांजिस्टर T1 के हिसाब से और
R4,R5 ट्रांजिस्टर T2 के हिसाब से लगाए गए है।

जिसमे सबसे महत्वपूर्ण है R4, जिसका मान किसी भी ट्रांजिस्टर के लिए 47K लेवे तो ज्यादा अच्छा है।
40K से निचे लेने पर यह पक्का ही काम नही करेगा।
R5 का मान 100 से 600 के बीच में ले सकते है और
लेकिन ध्यान रहे कम वोल्ट की बैटरी के साथ कम लेवे, एंव ज्यादा वोल्ट वाली के साथ ज्यादा।
वैसे मेने पढ़ा है कि इसका मान कम लेने पर ज्यादा अच्छी रेंज प्राप्त होती है।

R2 का मान 500K से ज्यादा हो तो अच्छा रहेगा।
पर जैसाकि मेने आगे वर्णन किया है, T2 एक ऑडियो एम्प्लीफायर है जिसे नही भी लगाए तो भी चलेगा।
R3 का मान 500 ओम से 1K ओम के बीच ले सकते है।

R1 का मान माइक पर निर्भर करता है।
जो 10K से 50K के बीच में हो सकता है।

माइक
माइक आप कोई सा भी एलेक्ट्रेट/कंडेंसर माइक ले सकते है।
आसानी से उपलब्ध होने वाला माइक है किसी बढ़िया कंपनी के इयरफोन में आने वाला माइक।

चाइनीज इयरफोनो के माइक सबसे बकवास आते है। यधपि चल तो वे भी जाएंगे पर इतना मस्त नही।

टेपरिकॉर्डर वाला माइक सबसे बेस्ट होता है।
R1 ,जो कि इस माइक को सही धारा प्रदान करता है, अलग अलग माइक के लिए अलग अलग होता है।
यह 10K से 50K के बीच में हो सकता है।इसके लिए आप एक अलग से वेरिएबल रेजिस्टेंस लगा कर देख ले। प्रतिरोध का एक ऐसा मान होगा जिस पर माइक आवाज के प्रति ज्यादा से ज्यादा सेंसेटिव होगा। उससे अधिक का या कम मान का प्रतिरोध लगाने पर यह उतना बढ़िया काम नही करेगा। यद्यपि काम तो यह हर प्रतिरोध के साथ करेगा।

कॉइल-
कॉइल के लिए आप किसी भी ताम्बे के तार का इस्तेमाल कर सकते है। इसके 5 या 6 लपेटे आप को किसी भी इयरफोन के जैक पर देने है।
कॉइल की इंडक्टेस का मान इसके लपेटो की संख्या, इसके व्यास, और इसकी लंबाई पर निर्भर करता है।
यंहा हमने लपेटे और व्यास(3.5 mm) फिक्स कर दिए है। अतः अब इसका मान बदलने के लिए इसे थोडा बधार देंगे(फेला लेंगे) जिससे इसके हर लपेटे के बिच में जगह हो जाए। इससे इसकी लंबाई बढ़ जायेगी। जिससे इसका मान बदल जाएगा।

एंटेना-
एंटेना के लिए हम किसी भी तार का इस्तेमाल कर सकते है। अच्छा तो वही ताँबे का तार रहेगा जिससे कॉइल बनाई है।
यह परिपथ कुछ पॉवर पैदा करता है। इस पैदा की गयी पॉवर में से कितनी पॉवर ट्रांसमिट होगी, यह एन्टेंना की लंबाई पर निर्भर करता है।
एन्टेंना की अधिकतम लंबाई फ्रीक्वेंसी की वेवलेंथ के बराबर होनी चाहिए। 100MHz की वेवलेंथ 3 मीटर होती है। इसका मतलब यह है कि 3 मीटर लंबी एंटेना से इसकी पूरी पॉवर ट्रांसमिट होगी। आधी लंबाई से आधी होगी।

ध्यान रहे, इस तरह के तार वाली एंटेना को इलेक्ट्रिक डाइपोल एंटेना कहते है। इसका दूसरा पोल, बैटरी का माइनस वाला सिर होता है जिस पर भी एक दूसरी एंटेना लगाईं जा सकती है। पर एंटेना की कुल लंबाई में ये दोनों ही एंटेना शामिल होते है।
इस तरह की एंटेना की लम्बाई से 90 डिग्री के कोण पर सारी तरंगे प्रसारित होती है। अर्थात एंटेना को खड़ा रखे।
अपने टेस्ट सर्किट के लिए आप चार अंगुल का कोई भी तार एंटेना के रूप में जोड़ सकते है।

सर्किट को टेस्ट करना-
अब कैसे पता चलेगा कि सर्किट काम कर रहा है या नही?
इसके लिए सबसे पहले आपको एक मल्टीमीटर चाहिए होगा।
और इस मल्टीमीटर से हम सर्किट द्वारा खींची गयी धारा मापेंगे।
अगर एंटेना छूने से इस धारा का मान बदलता है(काफी) तो इसका मतलब है हमारा सर्किट काम कर रहा है।
उसके पश्चात एक मात्र काम बचेगा इसकी फ्रीक्वेंसी को 88-108MHz के बीच सेट करना।
जैसे उदहारण के लिए मेरा सर्किट बिना एंटेना छुए 4.52 mA धारा लेता है। लेकिन एंटेना छूने पर यह बढ़ कर 5.02 mA हो जाती है। सर्किट अगर सही काम करेगा तो यह धारा बढ़ेगी। वर्ना अगर घट रही हो तो अपने कैपेसिटर के कनेक्शन जाँचे।

फ्रीक्वेंसी को 88-108MHz के बीच लाना-
क्योंकि FM इसी फ्रीक्वेंसी को कहते है। इसके लिए अपना मोबाइल फोन ले और इयरफोन लगा कर 88 MHz पर ट्यून करे।
अब एंटेना को छुए। अगर आपको आवाज में कोई बदलाव सुनाई देता है तो अच्छा है। वर्ना 108MHz पर ट्यून करे और यही प्रक्रिया दुबारा दोहराये।

एंटेना को छूने से कम से कम 2MHz फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है। अत: अभी यह कोनसी फ्रीक्वेंसी पर प्रसारण कर रहा है यह जानने के लिए 2- 2  MHz के अंतर पर अपने रेडियो को ट्यून करे और एंटेना को छू छू कर देखे। जंहा आवाज में अंतर नजर आये, वंही आस पास मैन्युअल ट्यून कर के देखे।

अगर आपने 6 लपेटे कॉइल पर लगाए है तो कॉइल की लंबाई बढ़ा ले यानि इसे फेला ले। इससे इसकी फ्रीक्वेंसी बढ़ जायेगी।
अगर फ्रीक्वेंसी घटानी हो तो इसकी लंबाई कम कर ले। यानि इसे सिकोड़ ले।

इस तरह कॉइल के आधार पर आप इसको फ्रीक्वेंसी सेट कर सकते है।

यह सर्किट कैसे काम करता है।-
इस छीर सर्किट के दो भाग है। एक ऑडियो एम्प्लीफायर है जो माइक से आवाज लेकर उसे बढ़ाता है। इससे आप किसी जगह की हलकी से हलकी आवाजे भी सुन पाते है। ऑडियो एम्प्लीफायर में सबसे पहले इनपुट के रूप में माइक जोड़ा गया है जो R1 से धारा लेते हुए चालू होता है।
माइक के सिरो पर आवाज के साथ सिग्नल पैदा होते है। जिन्हें T1 के बेस पर भेजा जाता है।
इनके बिच में 104 मान अंकित कैपेसिटर कपलर का काम करता है। इस कैपेसिटर से सिर्फ आवाज के सिग्नल आगे जाते है। इसे लगाना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा बिना आवाज के सिग्नल यानि DC धारा भी बेस में जायेगी और ट्रांजिस्टर सही काम नही करेगा।
ट्रांजिस्टर T1 को एक्टिव रीजन में रखने के लिए इसके बेस को 1M ओम के रजिस्टर द्वारा स्थिर धारा प्रदान की गयी है।
ट्रांजिस्टर के आउटपुट धारा में बदलाव आवाज के साथ साथ होता है जिसे वोल्टेज में बदलाव वाले सिग्नल में बदलने के लिए 1K ओम का रेजिस्टेंस जोड़ा गया है। इस प्रतिरोध के सिरो पर आवाज के साथ धारा में बदलाव के काऱण वोल्टेज में बदलाव होता है। फलतः पुन: वोल्टेज सिग्नल पैदा होते है। जिन्हें ट्रांजिस्टर T2 के बेस पर भेज दिया जाता है।

यंहा पुन: 104 अंकित कैपेसिटर कपलर का कार्य करता है जो कि महत्वपूर्ण है।

इस परिपथ का दूसरा भाग ट्रांजिस्टर T2 है जो 47K ओम प्रतिरोध द्वारा स्थिर धारा प्राप्त करके एक्टिव रीजन में कार्य करता है। इसमें लोड की जगह कॉइल एंव कैपेसिटर से बना टैंक सर्किट है जो कि FM आवृति की तरंगे पैदा करता है। ये तरंगे धारा में उतार चढ़ाव के रूप में होती है। लेकिन समय के साथ यह तरंगे क्षीण ना हो जाए इसके लिए C5 के द्वारा फीडबैक के जरिये इन्हें पुनः ट्रांजिस्टर के बेस पर भेजा जाता है। इससे ये पुनः आवर्धित होकर टैंक सर्किट में मिल जाती है। इससे ये तरंगे एक समान बनी रहती है एंव समय के साथ क्षीण नही होती।

टैंक सर्किट के निचले भाग से एंटेना जोड़ी गयी है।
जब धारा में उतार चढाव होता है तो इस एंटेना के अंदर इलेक्ट्रान आगे पीछे गति करते है जिससे विधुत चुम्बकीय तरंगे पैदा होती है जो वातावरण में फेल जाती है।

यंहा फीडबैक अप्रत्यक्ष है। जो C3 एंव C5 द्वारा पूरा होता है।
बैटरी के दोनों सिरो के मध्य कैपेसिटर इसलिए लगाया गया है ताकि इनके बीच में जो भी वोल्टेज में बदलाव हो(इन तरंगो के कारण) वह आपस में शार्ट होकर समाप्त हो जाए। इस कैपेसिटर के अभाव में यह सर्किट किसी हालत में काम नही करेगा।
T2 के एमिटर से जुड़ा प्रतिरोध भी इसकी बायसिंग का हिस्सा है। पर दोलको में यह बायसिंग अत्यंत आवश्यक है।

FM का मतलब है फ्रीक्वेंसी मोडुलेसन।
T2 वाला भाग एक फिक्स आवृति वाली तरंगे पैदा करता है। जिनमे कोई आवाज नही होती। माइक वाली आवाज इन तरंगो की आवृति में थोडा थोडा बदलाव करती है।
इस तरह से ये आवाज के अनुसार आवृति में बदलाव वाली तरंगे FM तरंगे कहलाती है।

कोई भी रेडियो रिसीवर इन तरंगो में इसी आवृति की लेकिन उलटी कला की तरंगे मिला कर इन्हें समाप्त कर देता है। बचता है सिर्फ इनमे होने वाला बदलाव। जिसे आवाज कहते है।

नोट्स-
1. इस पूरे सर्किट के 1 फुट पास कोई चीज रखने पर इसकी फ्रीक्वेंसी में थोडा बहुत बदलाव आ जाता है।

2. बैटरी के डिस्चार्ज होने के साथ साथ भी इसकी फ्रीक्वेंसी में थोडा बहुत बदलाव आता जाता है।

3. खुले वातावरण एंव ऊँची लंबी एंटेना में इसकी रेंज बढ़ जाती है जबकि छोटी एंटेना, कम ऊँची एंटेना एंव दीवारो एंव घरो के बीच इसकी रेंज कम हो जाती है।

4. हाथ से एंटेना छूने पर पता नही क्या होता है।

5. पूरे सर्किट को किसी धातु के बॉक्स में फिट करने पर ज्यादा अछि रेंज प्राप्त होती है( फैराडे शील्ड प्रभाव)।

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